TET For Contract Special Teacher: सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्देश दिया है। दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किए जाने वाले स्पेशल शिक्षकों की योग्यता को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर शिक्षक पात्रता परीक्षा को स्पेशल शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया गया है, तो पूरे देश में यह नियम समान नीति से लागू होना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को पक्ष रखने का आदेश दिया है, जिससे पूरे देश में समान नीति लागू की जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई पर केंद्र, राज्य सरकारें और अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
क्या है TET अनिवार्यता का मामला
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में संविदा पर रखे स्पेशल एजुकेटर को नियमित करने का आदेश दिया था तथा नए पदों पर संविदा से न भरकर, बल्कि रेगुलर पदों से भरने का आदेश भी दिया था। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल एजुकेटर को रखने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा या फिर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर किए गए दो हलफनामों का उल्लेख भी किया है, जिसमें 7 सितंबर 2025 और 16 नवंबर 2025 को दाखिल किए गए हलफनामे शामिल हैं। इनमें स्पष्ट कहा गया है कि स्पेशल एजुकेटर के लिए TET जरूरी कर दिया गया है। अदालत ने कहा है कि यह पहली बार उनके संज्ञान में आया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति के लिए भी अनिवार्य है। इसको लेकर अदालत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि अगर TET बाकी राज्यों में अनिवार्य है, तो इसे देशभर में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए, जिससे सभी राज्यों में स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति एक जैसी रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि यह पूरी तरह से स्पष्ट किया जाए कि केंद्र के नियमों या फिर अधिसूचनाओं में स्पेशल एजुकेटर के लिए TET अनिवार्य है या नहीं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि अगर ऐसा है, तो क्या राज्यों को पहले इस बारे में सभी निर्देश भेजे गए थे। कोर्ट ने कहा है कि शिक्षक पात्रता से जुड़ा कोई भी नियम पूरे देश में एक समान रूप से लागू होगा, विशेषकर तब जब बात स्पेशल एजुकेशन जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों की हो। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रण मुखर्जी ने कोर्ट को जानकारी दी कि 6 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना में TET अनिवार्यता को शामिल किया गया है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नियम पहले से कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट टीचर पर क्यों लागू नहीं किया गया और किस आधार पर इसे अब जोड़ा गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि स्पेशल एजुकेटर की नियुक्ति के लिए एक विशेष कट-ऑफ डेट क्यों निर्धारित की गई है और इसे स्थिति के आधार पर बनाने का क्या कारण है।
पहले से चल रही प्रक्रिया अभी जारी रहेगी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी मामला लंबे समय से चल रहा है। अभी जो प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वह जारी रहेगी। कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा, अभी रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बंगाल, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों को भी इसमें शामिल किया है। बता दें, इस पूरे मामले का सीधा असर देशभर के कॉन्ट्रैक्ट स्पेशल एजुकेटर पर पड़ेगा। यदि सुप्रीम कोर्ट TET को अनिवार्य मान लेता है, तो देशभर में स्पेशल एजुकेटर की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और नियम को समान रूप से पूरे देश में लागू किया जाएगा। कोर्ट इस मामले को लेकर फिर से सुनवाई करेगा और इसके बाद अंतिम निर्णय दिशा तय करेगा कि उत्तर प्रदेश की तरह पूरे देश में स्पेशल एजुकेटर TET लागू होगा या नहीं।





